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ज्योतिष एवं राशिफल

राशिफल

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गृह विज्ञान

वास्तु शास्त्र — मूल सिद्धांत

वास्तु शास्त्र भारत का प्राचीन वास्तुकला विज्ञान है जो ऊर्जा प्रवाह और दिशाओं के सामंजस्य पर आधारित है। इन मूल सिद्धांतों को अपनाकर आप घर और कार्यालय में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं।

उत्तर
North
कुबेर
ईशान
NE
पूजा घर
पूर्व
East
इंद्र
अग्नि
SE
रसोई
दक्षिण
South
यम
नैऋत्य
SW
मास्टर BR
पश्चिम
West
वरुण
वायव्य
NW
वायु
ब्रह्म
स्थान
🙏
ईशान (NE)
पूजा घर

उत्तर-पूर्व कोना सबसे पवित्र माना जाता है। यहाँ पूजा स्थान, पानी का स्रोत या ध्यान कक्ष बनाएं।

🔥
अग्नि (SE)
रसोई घर

दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व की है। रसोई यहाँ बनाना शुभ है। खाना बनाते समय मुख पूर्व दिशा में रखें।

🛏
नैऋत्य (SW)
मास्टर बेडरूम

घर का मुखिया दक्षिण-पश्चिम कमरे में रहे। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा में रखें।

💰
उत्तर
धन स्थान

उत्तर दिशा कुबेर (धन के देवता) की है। तिजोरी, लॉकर या कैश बॉक्स यहाँ रखें। दरवाजा उत्तर में शुभ।

🌅
पूर्व
मुख्य द्वार

पूर्व दिशा में मुख्य द्वार सबसे शुभ है। सुबह की धूप घर में प्रवेश करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

ब्रह्म स्थान
केंद्र — खुला रखें

घर का मध्य भाग (ब्रह्म स्थान) खुला और हल्का रखें। यहाँ कोई भारी सामान, स्तंभ या शौचालय न बनाएं।

🔷
वास्तु दोष
क्रिस्टल उपाय

वास्तु दोष दूर करने के लिए स्फटिक (Crystal Quartz) पिरामिड घर के केंद्र में, और काला टूर्मलीन मुख्य द्वार पर रखें।

🎨
रंग
दिशा अनुसार रंग

उत्तर — हरा/नीला। पूर्व — सफेद/हल्का पीला। दक्षिण — लाल/गुलाबी। पश्चिम — नीला/धूसर। मध्य — पीला/सुनहरा।

वास्तु के लिए अनुशंसित क्रिस्टल

🔮स्फटिक पिरामिडनकारात्मक ऊर्जा दूर करे
काला टूर्मलीनसुरक्षा कवच
💚ग्रीन जेडसमृद्धि और स्वास्थ्य
💛पाइराइटधन आकर्षण
🌸रोज़ क्वार्ट्ज़प्रेम और सौहार्द
💜अमेथिस्टमानसिक शांति
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