राशिफल
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वास्तु शास्त्र — मूल सिद्धांत
वास्तु शास्त्र भारत का प्राचीन वास्तुकला विज्ञान है जो ऊर्जा प्रवाह और दिशाओं के सामंजस्य पर आधारित है। इन मूल सिद्धांतों को अपनाकर आप घर और कार्यालय में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं।
North कुबेर
NE पूजा घर
East इंद्र
SE रसोई
South यम
SW मास्टर BR
West वरुण
NW वायु
स्थान
उत्तर-पूर्व कोना सबसे पवित्र माना जाता है। यहाँ पूजा स्थान, पानी का स्रोत या ध्यान कक्ष बनाएं।
दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व की है। रसोई यहाँ बनाना शुभ है। खाना बनाते समय मुख पूर्व दिशा में रखें।
घर का मुखिया दक्षिण-पश्चिम कमरे में रहे। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा में रखें।
उत्तर दिशा कुबेर (धन के देवता) की है। तिजोरी, लॉकर या कैश बॉक्स यहाँ रखें। दरवाजा उत्तर में शुभ।
पूर्व दिशा में मुख्य द्वार सबसे शुभ है। सुबह की धूप घर में प्रवेश करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
घर का मध्य भाग (ब्रह्म स्थान) खुला और हल्का रखें। यहाँ कोई भारी सामान, स्तंभ या शौचालय न बनाएं।
वास्तु दोष दूर करने के लिए स्फटिक (Crystal Quartz) पिरामिड घर के केंद्र में, और काला टूर्मलीन मुख्य द्वार पर रखें।
उत्तर — हरा/नीला। पूर्व — सफेद/हल्का पीला। दक्षिण — लाल/गुलाबी। पश्चिम — नीला/धूसर। मध्य — पीला/सुनहरा।